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दिग्विजय सिंह के बयान पर सुप्रिया श्रीनेत की प्रतिक्रिया क्या है?

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# दिग्विजय सिंह के बयान पर सुप्रिया श्रीनेत की प्रतिक्रिया क्या है?

## परिचय

हाल ही में दिग्विजय सिंह के एक विवादास्पद बयान ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अपनी राय साझा की है। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी जानकारी और सुप्रिया श्रीनेत के बयान का सार क्या है।

## दिग्विजय सिंह का बयान

दिग्विजय सिंह, जो कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हैं, ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कुछ ऐसे बयान दिए जो राजनीतिक विवाद का कारण बने। उनके बयानों में राजनीतिक रणनीति और विचारधारा के मुद्दों पर जोर दिया गया था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर कई आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक माहौल गर्म हो गया।

## सुप्रिया श्रीनेत का दृष्टिकोण

सुप्रिया श्रीनेत, जो कि कांग्रेस पार्टी की एक प्रमुख नेता हैं, ने दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमारे वरिष्ठ नेताओं के विचारों का सम्मान करना आवश्यक है, लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बयान देने से पहले तथ्यों की भलीभांति जांच होनी चाहिए।” उनका यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी में सभी नेताओं को विचारशीलता से काम लेना चाहिए।

### राजनीतिक एकता की आवश्यकता

सुप्रिया श्रीनेत ने आगे कहा कि वर्तमान समय में राजनीतिक एकता की आवश्यकता है। “हमें एकजुट होकर काम करना होगा ताकि हम देश के समक्ष आने वाली चुनौतियों का सामना कर सकें।” उनका यह बयान कांग्रेस पार्टी के भीतर एकता की आवश्यकता को रेखांकित करता है, खासकर जब पार्टी को आगामी चुनावों का सामना करना है।

## दिग्विजय सिंह के बयानों का असर

दिग्विजय सिंह के बयानों का असर न केवल कांग्रेस पार्टी पर बल्कि भारतीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। उनके बयानों ने भाजपा को प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया है, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। भाजपा ने उनके बयानों को निराधार बताते हुए कांग्रेस पर हमला किया है।

### कांग्रेस पार्टी की रणनीति

कांग्रेस पार्टी को इस प्रकार के बयानों से बचते हुए अपनी चुनावी रणनीति को मजबूती से तैयार करना होगा। सुप्रिया श्रीनेत की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि पार्टी में एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है, ताकि वे आगामी चुनावों में एक मजबूत मोर्चा बना सकें।

## सोशल मीडिया पर चर्चाएँ

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। कई लोग दिग्विजय सिंह के बयानों को सही मानते हैं, जबकि अन्य उन्हें निराधार बताते हैं। सुप्रिया श्रीनेत के बयान को भी सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ मिल रही हैं, जो दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति में विचारों का आदान-प्रदान कितना महत्वपूर्ण है।

### एक नई दिशा की ओर

सुप्रिया श्रीनेत का यह बयान दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी में युवा नेताओं का एक नया विचारधारा उभर रहा है। यह पार्टी को एक नई दिशा में ले जा सकता है, जहां विचारों का सम्मान किया जाएगा और एकता को प्राथमिकता दी जाएगी।

## निष्कर्ष

दिग्विजय सिंह के बयान और सुप्रिया श्रीनेत की प्रतिक्रिया ने भारतीय राजनीति में नई चर्चाएँ छेड़ी हैं। जहां दिग्विजय सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए, वहीं सुप्रिया श्रीनेत की प्रतिक्रिया ने पार्टी के भीतर एकता और विचारशीलता की आवश्यकता को रेखांकित किया। आगामी चुनावों में कांग्रेस पार्टी को एक मजबूत रणनीति की आवश्यकता है, ताकि वे राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर सकें। इस संदर्भ में, सुप्रिया श्रीनेत का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस में बंटी राय, RSS-BJP पर विरोध और समर्थन

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# दिग्विजय सिंह के बयान पर कांग्रेस में बंटी राय, RSS-BJP पर विरोध और समर्थन

## दिग्विजय सिंह का विवादास्पद बयान

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया है, जो पार्टी के भीतर विवाद का कारण बन गया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कामकाज और नीतियों पर अनेक सवाल उठाए। उनके इस बयान ने न केवल कांग्रेस में अलग-अलग राय को जन्म दिया, बल्कि पार्टी के भीतर भी आंतरिक मतभेदों को उजागर किया।

## कांग्रेस में बंटी राय

दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर दो धड़े बन गए हैं। एक पक्ष उनके बयान का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला मान रहा है। कुछ नेता इसे सही समय पर उठाया गया मुद्दा मानते हैं, जबकि अन्य इसे अनावश्यक विवाद के रूप में देख रहे हैं।

### समर्थन करने वाले नेता

कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि RSS और BJP की नीतियां देश के धर्मनिरपेक्षता और विविधता को खतरे में डाल रही हैं। इस धड़े के नेताओं का मानना है कि इस तरह के बयानों से पार्टी की स्थिति मजबूत होगी।

### विरोध करने वाले नेता

वहीं, कांग्रेस के कुछ अन्य नेता दिग्विजय सिंह के बयान को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार के बयानों से पार्टी की एकता पर बाधा आ सकती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि पार्टी को इस तरह के विवादों से बचना चाहिए और एकजुट होकर चुनावी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

## RSS और BJP पर आरोप

दिग्विजय सिंह ने RSS और BJP पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों संगठन देश में नफरत और विभाजन की राजनीति कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह न केवल लोकतंत्र के लिए हानिकारक है, बल्कि समाज के लिए भी अत्यंत खतरनाक है।

### राजनीतिक रणनीति का हिस्सा

विशेषज्ञों का मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। 2024 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए, पार्टी ने अपनी स्थिति को स्पष्ट करना शुरू कर दिया है। इस बिंदु पर, दिग्विजय सिंह का बयान एक प्रकार से विपक्षी दलों को चुनौती देने का एक साधन हो सकता है।

## कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस के लिए यह समय कई चुनौतियों का सामना करने का है। एक ओर जहां पार्टी को अपने भीतर की असहमति को सुलझाना है, वहीं दूसरी ओर उसे चुनावी मोर्चे पर भी मजबूत रहना है। दिग्विजय सिंह के बयान ने पार्टी के भीतर एक नई बहस को जन्म दिया है, जो आगामी चुनावों में उसकी रणनीति को प्रभावित कर सकता है।

## निष्कर्ष

दिग्विजय सिंह का बयान कांग्रेस के भीतर और उसके बाहर दोनों ही जगहों पर चर्चाओं का विषय बन गया है। जहां कुछ इसे सकारात्मक बदलाव के लिए एक कदम मानते हैं, वहीं अन्य इसे पार्टी के लिए हानिकारक समझते हैं। कांग्रेस के नेताओं को चाहिए कि वे इस विवाद को सुलझाकर एकजुटता के साथ आगे बढ़ें। आगामी चुनावों को देखते हुए, पार्टी को अपनी नीतियों और रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि वह अपने राजनीतिक अस्तित्व को मजबूती से बचा सके।

छठ पूजा की कहानी क्या है? (Chhath Puja Ki Kahani Kya Hai)

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छठ पूजा की कहानी: जानिए पूजा का महत्व और पौराणिक कथा

छठ पूजा भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र त्योहारों में से एक है, जो सूर्य देव और छठी मइया (ऊषा देवी) को समर्पित है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि छठ पूजा की शुरुआत कब हुई और इसके पीछे की कहानी क्या है?
आइए, जानते हैं इस आस्था, विज्ञान और परंपरा से जुड़ी गहराई।

छठ पूजा का महत्व (Importance of Chhath Puja)

छठ पूजा सूर्य देव की उपासना का पर्व है, जिसमें भक्त डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
सूर्य देव को ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन का स्रोत माना गया है।
यह पूजा व्यक्ति के मन, शरीर और आत्मा की शुद्धि के लिए की जाती है।

कहा जाता है कि छठ पर्व में की जाने वाली साधना इतनी पवित्र होती है कि इससे व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और परिवार में समृद्धि व सुख-शांति आती है।

छठ पूजा की कहानी (The Legend of Chhath Puja)

छठ पूजा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, लेकिन मुख्य रूप से दो प्रसिद्ध कहानियाँ प्रचलित हैं —

1. राजा प्रियव्रत और उनकी संतान की कथा

प्राचीन काल में राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी रहते थे। दोनों बहुत धार्मिक थे, परंतु संतानहीन थे। उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए एक यज्ञ करवाया।
यज्ञ पूर्ण होने के बाद रानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, लेकिन वह मृत था।

राजा और रानी अत्यंत दुखी हो गए। तभी आकाश से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुईं, जिन्होंने कहा —

“मैं षष्ठी देवी हूँ, बच्चों की रक्षा करने वाली माता। यदि तुम मेरी विधिवत पूजा करोगे, तो तुम्हें संतान की प्राप्ति होगी।”

राजा प्रियव्रत ने देवी की आज्ञा अनुसार षष्ठी तिथि को पूजा की और उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
तभी से इस दिन को “छठ पूजा” के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।

2. महाभारत काल की कथा – कुंती और द्रौपदी का व्रत

महाभारत काल में भी छठ पूजा का उल्लेख मिलता है।
कहते हैं कि कुंती माता ने सूर्य देव की आराधना की थी, जिससे उन्हें कर्ण जैसा तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ।

बाद में द्रौपदी ने भी पांडवों के संकट काल में छठ व्रत रखा था।
द्रौपदी ने सूर्य देव से प्रार्थना की थी कि उनके पति संकट से बाहर आएं।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने पांडवों को उनका राज्य और सम्मान वापस दिलाने में मदद की।

इसलिए छठ पूजा को शक्ति, आस्था और विश्वास का पर्व भी कहा जाता है।

छठ मइया कौन हैं? (Who is Chhathi Maiya?)

छठ मइया को ऊषा देवी भी कहा जाता है, जो सूर्य देव की पत्नी हैं।
ऋग्वेद में उल्लेख है कि सूर्य की दो पत्नियाँ हैं — संझ्या (संध्या) और ऊषा (भोर की देवी)
ऊषा ही वह देवी हैं जो नवजात शिशुओं और माताओं की रक्षा करती हैं

लोग मानते हैं कि छठ मइया से सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
वह अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं और परिवार में सुख-शांति का वरदान देती हैं।

छठ पूजा कैसे की जाती है? (How Chhath Puja is Celebrated)

छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला पर्व है। हर दिन का विशेष महत्व होता है —

1. नहाय-खाय (पहला दिन)

इस दिन व्रती शुद्ध जल से स्नान करते हैं और घर की सफाई करके सात्विक भोजन करते हैं।
भोजन में लौकी-भात और चना दाल प्रमुख होते हैं। यह दिन शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है।

2. खरना (दूसरा दिन)

व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी और केला खाकर उपवास तोड़ते हैं।
इसके बाद अगले 36 घंटे तक निर्जला उपवास (बिना पानी का व्रत) रखा जाता है।

3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)

इस दिन व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
संपूर्ण परिवार इस समय घाट पर एकत्र होता है, और लोकगीतों से वातावरण भक्ति में डूब जाता है।

4. उषा अर्घ्य (चौथा दिन)

अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है।
व्रती सूर्य देव और छठ मइया से परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

छठ पूजा के गीत और लोक संस्कृति

छठ पूजा का असली आकर्षण इसके लोकगीत और पारंपरिक भावनाएँ हैं।
घाटों पर गूंजते गीत —

“केलवा जे फरेला घवद से, ओ पिया…”
या
“उग हो सूरज देव, भइल अंधियार…”

ये गीत न सिर्फ पूजा का हिस्सा हैं, बल्कि बिहार और पूर्वी भारत की लोकसंस्कृति की आत्मा भी हैं।

छठ पूजा के वैज्ञानिक पहलू

कई वैज्ञानिक भी मानते हैं कि छठ पूजा का संबंध प्राकृतिक ऊर्जा और स्वास्थ्य से है।
सूर्य की किरणों से शरीर में विटामिन D बनता है और मानसिक शांति मिलती है।
उपवास और सूर्य स्नान से शरीर की डिटॉक्स प्रक्रिया तेज होती है।
इस तरह यह पूजा आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से लाभदायक है।

छठ पूजा के दौरान विशेष नियम

  • पूजा के समय व्रती को पूरी तरह शुद्धता और पवित्रता बनाए रखनी होती है।
  • रसोई में लहसुन-प्याज का प्रयोग वर्जित होता है।
  • मिट्टी के बर्तनों में ही प्रसाद बनाया जाता है।
  • किसी भी प्रकार की दिखावेबाज़ी या शोरगुल नहीं किया जाता।

यह व्रत आत्मसंयम, त्याग और अनुशासन का प्रतीक है।

छठ पूजा का सामाजिक संदेश

छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि एक सामाजिक एकता और समानता का प्रतीक है।
इसमें अमीर-गरीब, ऊँच-नीच, जाति-धर्म का कोई भेदभाव नहीं होता।
सभी लोग एक साथ घाट पर इकट्ठे होकर एक ही सूर्य देव की आराधना करते हैं।

यह हमें सिखाता है कि —

“प्रकृति और ईश्वर सभी के लिए समान हैं।”

निष्कर्ष: आस्था, अनुशासन और प्रकृति का संगम

छठ पूजा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का उत्सव है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में संयम, श्रद्धा और सच्ची भक्ति से हर मुश्किल आसान हो सकती है।

चाहे विज्ञान की दृष्टि से देखें या आध्यात्मिक नजरिए से —
छठ पूजा भारतीय संस्कृति का एक अद्भुत प्रतीक है, जो आस्था को विज्ञान से जोड़ता है।

दिल्ली क्लाउड सीडिंग ट्रायल क्यों नहीं हुआ सफल? IIT कानपुर निदेशक ने बताया असली कारण

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Delhi cloud seeding

दिल्ली की हवा एक बार फिर चर्चा में है। बढ़ते प्रदूषण, धुंध और स्मॉग के बीच लोगों की उम्मीदें बंधी थीं एक प्रयोग से — क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding)। यह वह तकनीक है जिससे कृत्रिम बारिश करवाकर हवा को साफ करने की कोशिश की जाती है।
लेकिन सवाल ये है कि जब सब कुछ तैयार था, तब भी दिल्ली में क्लाउड सीडिंग ट्रायल असफल क्यों हुआ? आखिर किस वजह से यह प्रयोग काम नहीं कर सका?

इसी का जवाब दिया है IIT कानपुर के निदेशक प्रोफेसर संदीप वर्मा ने, जिन्होंने इस परियोजना की निगरानी भी की थी। चलिए जानते हैं विस्तार से — आखिर यह तकनीक क्या है, कैसे काम करती है, और क्यों दिल्ली में यह प्रयोग सफल नहीं हो पाया।

क्लाउड सीडिंग क्या होती है? (What is Cloud Seeding?)

क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके जरिए बादलों में कृत्रिम रूप से बारिश करवाने की कोशिश की जाती है।
इसमें विमानों या रॉकेट्स के माध्यम से बादलों में सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड या ड्राई आइस (Dry Ice) जैसे रासायनिक तत्व छोड़े जाते हैं। ये तत्व बादलों में मौजूद जलवाष्प के साथ मिलकर कृत्रिम वर्षा के कण बनाते हैं, जिससे बारिश होती है।

यह तकनीक पहली बार 1940 के दशक में अमेरिका में इस्तेमाल की गई थी और आज चीन, इज़राइल, दुबई, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इसे नियमित रूप से अपनाते हैं।

दिल्ली में क्लाउड सीडिंग की जरूरत क्यों पड़ी?

दिल्ली में सर्दियों के मौसम में प्रदूषण स्तर खतरनाक सीमा पार कर जाता है। धूल, धुआं, वाहनों का उत्सर्जन और पराली जलाने का असर मिलकर हवा को जहरीला बना देते हैं।
ऐसे में क्लाउड सीडिंग को एक उम्मीद की तरह देखा गया — ताकि कृत्रिम बारिश से हवा में मौजूद प्रदूषक कण नीचे गिर जाएं और हवा साफ हो सके।

IIT कानपुर की टीम ने दिल्ली सरकार के सहयोग से यह प्रयोग किया, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

क्यों नहीं हुई बारिश? IIT कानपुर निदेशक का स्पष्टीकरण

IIT कानपुर के निदेशक ने स्पष्ट किया कि “मौसम की परिस्थितियां क्लाउड सीडिंग के अनुकूल नहीं थीं।”
उन्होंने कहा —

“क्लाउड सीडिंग तभी सफल होती है जब आसमान में पर्याप्त बादल और नमी मौजूद हो। उस समय दिल्ली का मौसम शुष्क था और बादलों की घनता बहुत कम थी। इसलिए हमारे द्वारा छोड़े गए कण पर्याप्त जलकण नहीं बना पाए।”

यानी साफ शब्दों में कहें तो मौसम ने साथ नहीं दिया

तकनीकी कारणों ने भी डाला असर

सिर्फ मौसम ही नहीं, कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारण भी असफलता की वजह बने।
IIT कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार:

  1. बादलों की ऊंचाई और घनता (Cloud Density) पर्याप्त नहीं थी।
  2. हवा की दिशा लगातार बदल रही थी, जिससे विमान सही स्थान पर सीडिंग नहीं कर सका।
  3. एयर ट्रैफिक कंट्रोल से अनुमति मिलने में देरी हुई।
  4. वायु गुणवत्ता (AQI) पहले से इतनी खराब थी कि तत्काल प्रभाव देखना मुश्किल था।
  5. नमी का स्तर (Humidity) 40% से भी नीचे था, जबकि सफल सीडिंग के लिए 60% या उससे अधिक की जरूरत होती है।

क्लाउड सीडिंग की वैज्ञानिक प्रक्रिया – स्टेप बाय स्टेप

कई लोग सोचते हैं कि क्लाउड सीडिंग बस रसायन छोड़ने से काम कर जाती है, लेकिन यह एक जटिल वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
यहां जानिए इसके स्टेप्स:

  1. मौसम विश्लेषण: पहले मौसम विभाग बादलों की दिशा, गति और घनता का विश्लेषण करता है।
  2. विमान की तैयारी: विमान में विशेष उपकरण लगाए जाते हैं जो सिल्वर आयोडाइड या नमक के कण हवा में छोड़ते हैं।
  3. बादलों में प्रवेश: विमान उचित ऊंचाई पर जाकर बादलों के बीच रसायन फैलाता है।
  4. संघनन प्रक्रिया: रसायन जलवाष्प से मिलकर जलकण बनाते हैं।
  5. वर्षा का निर्माण: जब ये कण भारी हो जाते हैं, तो वर्षा के रूप में नीचे गिरते हैं।

अगर इनमें से कोई भी कदम गड़बड़ा जाए — जैसे कि पर्याप्त बादल न हों — तो पूरा प्रयोग बेअसर हो जाता है।

क्या सिर्फ दिल्ली में ही असफल हुआ ट्रायल?

नहीं, ऐसा नहीं है। भारत के कई हिस्सों में पहले भी क्लाउड सीडिंग ट्रायल्स किए गए हैं।
उदाहरण के लिए:

  • महाराष्ट्र में 2015 और 2018 में ट्रायल हुआ था, लेकिन बारिश सीमित रही।
  • कर्नाटक में भी बेंगलुरु और हुबली के पास प्रयोग किया गया, वहां आंशिक सफलता मिली।
  • हिमाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले इलाकों में यह तकनीक काम कर गई थी, क्योंकि वहां नमी अधिक थी।

इसलिए यह कहना गलत होगा कि तकनीक फेल है। असफलता सिर्फ मौसम और समय की वजह से आई।

क्लाउड सीडिंग सफल होने के लिए जरूरी शर्तें

IIT कानपुर के विशेषज्ञों के अनुसार, क्लाउड सीडिंग तभी कारगर होती है जब:

  1. आसमान में क्यूम्यलस टाइप बादल (Cumulus Clouds) हों।
  2. तापमान 0 से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच हो।
  3. हवा की दिशा स्थिर रहे।
  4. नमी 60% से अधिक हो।
  5. प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक न हो।

दिल्ली में इनमें से एक भी शर्त पूरी नहीं हुई, इसलिए परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले।

IIT कानपुर की भविष्य की योजना

IT कानपुर ने कहा है कि यह ट्रायल असफल नहीं बल्कि सीखने का अवसर था।
उनका कहना है कि अगली बार वे मौसम के अनुसार बेहतर समय और क्षेत्र का चयन करेंगे।
निदेशक के अनुसार:

“हमने सीखा कि मौसम का सही चुनाव इस प्रक्रिया की कुंजी है। अगले प्रयास में हम सटीक डेटा विश्लेषण के साथ इसे दोहराएंगे।”

इस बार IIT कानपुर ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के साथ मिलकर नई रणनीति बनाने की योजना बनाई है।

दुनिया में कहां सफल हुई क्लाउड सीडिंग?

कई देशों ने क्लाउड सीडिंग से अच्छे परिणाम पाए हैं:

  • चीन: बीजिंग ओलंपिक (2008) से पहले बारिश रोकने और बाद में करवाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
  • यूएई (दुबई): हर साल गर्मी में क्लाउड सीडिंग कर बारिश बढ़ाई जाती है।
  • इज़राइल: रेगिस्तानी इलाकों में खेती के लिए कृत्रिम वर्षा सफल रही।
  • ऑस्ट्रेलिया: जल संकट से निपटने के लिए कई क्षेत्रों में इसे लागू किया गया।

इन उदाहरणों से साफ है कि यह तकनीक कारगर है — बस सही मौसम और सटीक योजना की जरूरत है।

क्या क्लाउड सीडिंग सुरक्षित है?

कई लोग यह सवाल पूछते हैं कि क्या सिल्वर आयोडाइड या अन्य रसायन से पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है?
IIT कानपुर के वैज्ञानिकों का कहना है —

“हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रसायन बहुत सीमित मात्रा में होते हैं, जो पर्यावरण या मनुष्यों के लिए हानिकारक नहीं हैं।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी इस तकनीक को सेफ और नियंत्रित प्रयोगों के लिए उपयुक्त बताया है।

दिल्ली की हवा: समस्या और समाधान

दिल्ली की हवा आज दुनिया की सबसे प्रदूषित हवाओं में से एक है।
क्लाउड सीडिंग सिर्फ एक अस्थायी राहत दे सकती है।
दीर्घकालिक समाधान के लिए जरूरी है:

  • वाहन उत्सर्जन को नियंत्रित करना
  • ग्रीन एनर्जी और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना
  • औद्योगिक प्रदूषण पर सख्त नियंत्रण
  • पौधारोपण और हरित क्षेत्र का विस्तार

क्लाउड सीडिंग तभी काम करेगी जब ये कदम भी साथ चलेंगे।

लोगों की उम्मीदें और सरकार की चुनौती

दिल्लीवासियों को उम्मीद थी कि इस बार क्लाउड सीडिंग से कुछ राहत मिलेगी।
हालांकि प्रयोग काम नहीं कर पाया, लेकिन इसने यह साबित किया कि सरकार और वैज्ञानिक मिलकर नई राहें खोज रहे हैं।
अब जनता की नजर अगली कोशिश पर है, जो संभवतः आने वाले महीनों में की जाएगी।

निष्कर्ष

क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) एक उन्नत वैज्ञानिक तकनीक है जो कृत्रिम वर्षा के जरिए हवा को साफ करने और जल की कमी दूर करने में मदद कर सकती है।
लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह मौसम, नमी और तकनीकी सटीकता पर निर्भर करती है।

दिल्ली में यह ट्रायल भले ही असफल रहा हो, लेकिन IIT कानपुर के वैज्ञानिकों का कहना है कि अगली बार यह प्रयोग और मजबूत तैयारी के साथ दोहराया जाएगा।

अगर यह भविष्य में सफल होता है, तो यह न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश के लिए प्रदूषण से राहत की एक नई उम्मीद बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में हंगामा: chief  justice br gavai CJI गवई पर जूता फेंकने वाले वकील ने कहा ‘No Regrets’

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CJI गवई पर जूता फेंकने वाले वकील ने कहा ‘No Regrets’

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई जब एक वकील ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से यह प्रयास नाकाम हो गया। घटना के बाद उस वकील को तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि वकील ने गिरफ्तारी के बाद मीडिया से कहा —

“मुझे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है (No regrets).”

क्या हुआ था कोर्ट में?

जानकारी के मुताबिक, यह घटना सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान हुई, जब CJI बी.आर. गवई की बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी।
तभी एक वकील, जो खुद को “न्याय के लिए आवाज़ उठाने वाला” बता रहा था, अचानक खड़ा हुआ और अपनी नाराज़गी जताते हुए जूता फेंकने की कोशिश की

सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रोक लिया और कोर्टरूम से बाहर ले गए।

वकील ने क्यों किया ऐसा?

गिरफ्तारी के बाद जब मीडिया ने उस वकील से पूछा कि उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, तो उसका जवाब था —

“मुझे सिस्टम से निराशा है। मैं न्याय की तलाश में सालों से भटक रहा हूं। अगर कोई नहीं सुनेगा, तो हमें अपनी बात रखने के लिए कुछ बड़ा करना पड़ेगा।”

उसने आगे कहा कि

“मुझे अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। मैंने ये कदम सिस्टम की सच्चाई दिखाने के लिए उठाया है।”

पुलिस और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वकील को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट के अधिकारियों ने इसे “गंभीर सुरक्षा उल्लंघन (Serious Security Breach)” बताया है और कहा कि कोर्ट परिसर में सुरक्षा को और कड़ा किया जाएगा।

CJI गवई ने इस घटना पर शांत और संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा:

“ऐसी घटनाएँ न्याय प्रणाली को नहीं डिगा सकतीं। न्याय हमेशा कानून के दायरे में ही होगा।”

सोशल मीडिया पर बहस

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।
कई लोगों ने वकील की हरकत को “अशोभनीय और अपमानजनक” बताया,
जबकि कुछ लोगों ने कहा कि “यह सिस्टम की गहरी खामियों की झलक है।”

ट्विटर (X) पर “#CJI_Gavai” और “#SupremeCourt” जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

CJI गवई कौन हैं?

मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई (B. R. Gavai) भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश हैं।
वे महाराष्ट्र के अमरावती से हैं और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित माने जाते हैं।
उनका कार्यकाल 2025 में शुरू हुआ, और वे भारत के पहले बौद्ध धर्मावलंबी (Buddhist) CJI हैं।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था में इस तरह की घटनाएँ न केवल न्याय प्रणाली की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में असंतोष और गुस्से की झलक भी दिखाती हैं।
वकील का “नो रिग्रेट्स” बयान यह दर्शाता है कि न्यायिक सुधार की आवश्यकता पर समाज में चर्चा बढ़ रही है।

हालांकि, किसी भी असहमति को व्यक्त करने का तरीका कानून और मर्यादा के भीतर ही होना चाहिए —
क्योंकि न्याय के मंदिर में हिंसा नहीं, विवेक का स्थान है।

LPG गैस सिलेंडर और GST 2.0: 22 सितम्बर से नया बदलाव

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LPG गैस सिलेंडर

भारत में LPG गैस सिलेंडर हर घर का अहम हिस्सा है। खाना बनाने से लेकर छोटे उद्योगों तक, LPG की भूमिका बहुत बड़ी है। यही कारण है कि LPG की कीमतों और टैक्स संरचना (GST) में बदलाव सीधा असर जनता की जेब पर डालता है।

अब 22 सितम्बर 2025 से GST 2.0 लागू होने जा रहा है, और लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि इसका असर LPG सिलेंडरों पर कैसा होगा।

GST 2.0 क्या है?

GST 2.0 को सरकार “नए और सरल टैक्स ढांचे” के रूप में पेश कर रही है। इसका मकसद है:

  • टैक्स स्लैब की संख्या घटाना
  • रोजमर्रा की ज़रूरतों को सस्ता बनाए रखना
  • उद्योगों और सेवाओं के लिए मानक दर (18%) लागू करना

घरेलू LPG सिलेंडर (Cooking Use)

अब तक घरेलू गैस सिलेंडर पर 5% GST लागू था।

विशेषज्ञ मानते हैं कि GST 2.0 में भी यह दर बरकरार रहेगी।

सरकार चाहती है कि आम जनता को रसोई गैस सस्ते दामों पर मिलती रहे।

व्यावसायिक LPG सिलेंडर (Commercial Use)

  • रेस्टोरेंट, होटल और व्यवसायों में उपयोग होने वाले LPG सिलेंडरों पर GST 2.0 के बाद 18% टैक्स लगने की संभावना है।
  • इससे रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस महंगी हो सकती हैं।

इंडस्ट्रियल LPG

उद्योगों में उपयोग होने वाले बड़े सिलेंडरों पर पहले से ही ऊँचा GST लागू है।

GST 2.0 के बाद भी इसमें खास बदलाव की उम्मीद नहीं है।

उपभोक्ताओं पर सीधा असर

घरेलू उपभोक्ता: सिलेंडर की कीमत स्थिर रहेगी, यानी जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं।

व्यावसायिक उपभोक्ता: टैक्स बढ़ने से ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ेगी।

फूड इंडस्ट्री: बाहर खाने-पीने के दाम पर असर पड़ेगा।

Q1. 22 सितम्बर 2025 से घरेलू LPG सिलेंडर महंगा होगा?

नहीं, घरेलू सिलेंडर पर GST दर 5% ही रहने की संभावना है।

Q2. व्यावसायिक LPG सिलेंडर पर कितना GST लगेगा?

GST 2.0 में इसकी दर 18% होने की उम्मीद है।

Q3. क्या LPG पर सब्सिडी जारी रहेगी?

हाँ, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी और DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) पहले की तरह जारी रह सकती है।

Q4. GST 2.0 से आम जनता को क्या फायदा होगा?

आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी क्योंकि ज़रूरी वस्तुओं (जैसे LPG) को सस्ती श्रेणी में रखा गया है।

22 सितम्बर से लागू होने वाला GST 2.0 LPG सिलेंडरों पर बड़ा बदलाव नहीं लाएगा। घरेलू उपयोग के लिए सिलेंडर की कीमतें पहले जैसी ही रहेंगी, जबकि व्यावसायिक और इंडस्ट्रियल उपयोग में लागत बढ़ सकती है। सरकार का मकसद है कि रोज़मर्रा की ज़रूरतें किफायती रहें और टैक्स ढांचा और भी सरल हो।

Who is Himanshu Bhau? जानिए हरियाणा-एनसीआर के खतरनाक गैंगस्टर की पूरी कहानी

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Who is Himanshu Bhau

हिमांशु भाऊ कौन हैं? (Who is Himanshu Bhau)

हाल ही में चर्चित यूट्यूबर एल्विश यादव के घर पर हुई गोलीबारी के बाद जिस नाम ने सुर्ख़ियाँ बटोरीं, वह है हिमांशु भाऊ। बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि हिमांशु भाऊ कौन हैं और उनका आपराधिक बैकग्राउंड क्या है।

हरियाणा का कुख्यात गैंगस्टर

हिमांशु भाऊ का असली नाम हिमांशु उर्फ भाऊ है और वे हरियाणा के रोहतक जिले के रिटौली गांव के रहने वाले हैं। उन्हें हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर का मोस्ट वॉन्टेड गैंगस्टर माना जाता है। उनके खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण, धोखाधड़ी और अवैध हथियारों से जुड़े 18 से अधिक मामले दर्ज हैं।

अपराध की शुरुआत

बताया जाता है कि हिमांशु भाऊ का आपराधिक सफर महज 17 साल की उम्र में शुरू हुआ। 2010 में एक फायरिंग केस में उनका नाम आया और उसके बाद वे बाल सुधार गृह से फरार हो गए। तभी से उन्होंने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया और धीरे-धीरे एक गैंग बना ली।

इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस

उनकी बढ़ती आपराधिक गतिविधियों के चलते इंटरपोल ने उनके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। पुलिस का मानना है कि वे विदेश में बैठकर भी भारत में अपनी गैंग को संचालित करते हैं।

दिल्ली-एनसीआर में आतंक

हिमांशु भाऊ की गैंग ने पिछले कुछ वर्षों में कई घटनाओं को अंजाम दिया है—

  • दिल्ली के राजौरी गार्डन के बर्गर किंग पर फायरिंग
  • दिल्ली-एनसीआर के कई शो-रूम्स और कारोबारियों को धमकी
  • और अब गुरुग्राम स्थित एल्विश यादव के घर पर गोलीबारी की जिम्मेदारी

उनकी गैंग ने दावा किया कि एल्विश यादव द्वारा प्रमोट किए गए अवैध ऐप्स ने कई परिवारों को तबाह किया, इसलिए यह हमला किया गया।

क्यों चर्चा में हैं?

गुरुग्राम फायरिंग केस के बाद हिमांशु भाऊ का नाम पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “हरियाणा का नया गैंगस्टर चेहरा” कह रहे हैं।

निष्कर्ष

संक्षेप में, हिमांशु भाऊ एक कुख्यात अपराधी और गैंगस्टर हैं जो हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर पुलिस के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। एल्विश यादव के घर पर हुई फायरिंग ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि पुलिस और इंटरपोल की कार्रवाई उन्हें पकड़ पाती है या नहीं।

एल्विश यादव के घर पर गोलीकांड: क्या हिमांशु भाऊ हैं जिम्मेदार?

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एल्विश यादव गोलीकांड

सोशल मीडिया की दुनिया में आए दिन विवाद और चर्चाएँ सुर्ख़ियाँ बटोरती रहती हैं। लेकिन इस बार मामला बेहद गंभीर है क्योंकि मशहूर यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी 2 के विजेता एल्विश यादव के घर के बाहर गोली चलने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद से फैंस के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसके पीछे कौन है और क्यों हुआ ऐसा?

गोलीकांड की पूरी घटना

गुरुग्राम स्थित एल्विश यादव के घर के बाहर देर रात अचानक गोलियों की आवाज़ें सुनाई दीं। इलाके के लोगों में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। शुरुआती जांच में यह पता चला कि इस गोलीकांड के पीछे व्यक्तिगत रंजिश या सोशल मीडिया विवाद हो सकता है।

हिमांशु भाऊ का नाम क्यों आ रहा है सामने?

कई मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं में हिमांशु भाऊ का नाम इस घटना से जोड़ा जा रहा है। गौरतलब है कि एल्विश यादव और हिमांशु भाऊ के बीच लंबे समय से सोशल मीडिया पर वाद-विवाद और बयानबाज़ी का सिलसिला चलता रहा है। दोनों के फैंस भी अक्सर आमने-सामने हो जाते हैं। यही वजह है कि लोग अब इस गोलीकांड को उसी विवाद से जोड़कर देख रहे हैं।

हालाँकि अभी तक पुलिस ने किसी के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही हिमांशु भाऊ की ओर से इस मामले पर कोई बयान आया है।

पुलिस की कार्रवाई

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर ली और CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्राथमिक जांच में कहा गया है कि गोली चलने से कोई घायल नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले की सच्चाई सामने आ जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फैंस की प्रतिक्रिया

घटना के बाद से सोशल मीडिया पर #ElvishYadav और #HimanshuBhau जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एल्विश के फैंस उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता जता रहे हैं और पुलिस से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे यूट्यूब और सोशल मीडिया की प्रतिस्पर्धा का खतरनाक नतीजा बता रहे हैं।

निष्कर्ष

फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि एल्विश यादव के घर पर गोली चलवाने के पीछे वास्तव में हिमांशु भाऊ का हाथ है या नहीं। लेकिन इतना ज़रूर है कि यह मामला सोशल मीडिया की दुनिया से निकलकर अब कानून और पुलिस की जांच तक पहुँच चुका है। आने वाले दिनों में ही सच सामने आएगा कि इस गोलीकांड के लिए कौन जिम्मेदार है।

एकादशी व्रत कथा: श्रद्धा और मोक्ष की राह

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ekadashi vrat katha

एकादशी व्रत क्यों है खास?

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन उपवास करने से मनुष्य के पाप नष्ट होते हैं और आत्मा को शांति मिलती है।

एकादशी की पौराणिक कथा (मुर्मासुर और भगवान विष्णु)

एक बार नारद जी ने भगवान विष्णु से पूछा,
“भगवन, एकादशी व्रत का क्या महत्व है?”

भगवान विष्णु ने उत्तर दिया:

प्राचीन समय में एक राक्षस था जिसका नाम था मुर्मासुर। वह देवताओं को परेशान करता था और स्वर्ग लोक तक को कष्ट देने लगा था। भगवान विष्णु ने उसका अंत करने का निर्णय लिया और उससे युद्ध करने लगे। युद्ध बहुत लंबा चला।

एक दिन भगवान थोड़े विश्राम के लिए एक गुफा में चले गए। तभी मुर्मासुर ने गुफा में घुसकर उन पर आक्रमण करने की कोशिश की। भगवान के शरीर से उसी समय एक तेजस्विनी देवी प्रकट हुई। उस देवी ने मुर्मासुर का वध कर दिया।

जब भगवान विष्णु जागे, तो उन्होंने देवी से पूछा,
“तुम कौन हो?”

देवी बोलीं, “मैं आपकी ही योगशक्ति हूं, और आज जो तिथि है, वही एकादशी कहलाएगी। इस दिन जो भी व्रत करेगा, उसे आपके लोक की प्राप्ति होगी।”

भगवान विष्णु ने आशीर्वाद देते हुए कहा:
“जो भी श्रद्धा से एकादशी का व्रत करेगा, उसे समस्त पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त होगा।”

व्रत की विधि: एकादशी कैसे करें?

दशमी की रात से ही सात्विक भोजन करें, लहसुन-प्याज त्यागें।

एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें।

दिनभर व्रत रखें — चाहे निर्जल या फलाहार।

पूजा में तुलसी दल जरूर अर्पित करें।

विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता या एकादशी कथा का पाठ करें।

रात को जागरण करें या भजन-संकीर्तन में समय दें।

अगले दिन द्वादशी को व्रत का पारण करें और जरूरतमंदों को दान दें।

एकादशी व्रत के लाभ

मानसिक तनाव से मुक्ति

आत्मिक शुद्धि और शांति

पूर्व जन्म के पापों का नाश

मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग

रोगों और शारीरिक कष्टों से राहत

वर्षभर की प्रमुख एकादशियाँ

मासशुक्ल पक्षकृष्ण पक्ष
चैत्रकामदा एकादशीपापमोचिनी एकादशी
वैशाखमोहिनी एकादशीवरूथिनी एकादशी
ज्येष्ठनिर्जला एकादशीअपरा एकादशी
आषाढ़पद्मिनी एकादशीयोगिनी एकादशी
श्रावणशयन एकादशीकामिका एकादशी
भाद्रपदपरिवर्तिनी एकादशीअजा एकादशी
आश्विनपापांकुशा एकादशीइंदिरा एकादशी
कार्तिकरमा एकादशीराम एकादशी
मार्गशीर्षमोक्षदा एकादशीउत्पन्ना एकादशी
पौषपुत्रदा एकादशीसफला एकादशी
माघषट्तिला एकादशीपुत्रदा एकादशी
फाल्गुनअमलकी एकादशीविजय एकादशी

एकादशी व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि मानसिक और शारीरिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी है। यह आत्मा की शुद्धि, आस्था की गहराई और मोक्ष की ओर एक कदम है। जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ यह व्रत करता है, उसे भगवान विष्णु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

PM Kisan 20वीं किस्त जारी: पीएम मोदी ने किसानों के खाते में भेजी सहायता राशि, ऐसे करें स्टेटस चेक

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PM Kishan Yojana

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Yojana) की 20वीं किस्त का पैसा केंद्र सरकार ने जारी कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि ट्रांसफर की है। यदि आप भी इस योजना के लाभार्थी हैं, तो अब आप आसानी से जान सकते हैं कि आपके खाते में पैसा आया है या नहीं।

कितनी राशि मिली है?

PM Kisan योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं। इस बार 2,000 रुपये की 20वीं किस्त सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी गई है।

ऐसे करें चेक – पैसा आया या नहीं?

अगर आप जानना चाहते हैं कि आपको PM Kisan की 20वीं किस्त मिली है या नहीं, तो नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:

  1. PM Kisan की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं:
    🔗 https://pmkisan.gov.in
  2. ‘बेनिफिशियरी स्टेटस’ पर क्लिक करें।
  3. अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें।
  4. कैप्चा कोड डालकर ‘Get Data’ पर क्लिक करें।
  5. अब स्क्रीन पर आपकी किस्तों का पूरा स्टेटस दिखाई देगा।

अगर पैसा नहीं आया तो क्या करें?

अपने PM Kisan KYC की स्थिति चेक करें।

अपने बैंक खाते से आधार कार्ड लिंक है या नहीं, यह सुनिश्चित करें।

अपने नजदीकी CSC सेंटर या कृषि विभाग कार्यालय में संपर्क करें।

आप हेल्पलाइन नंबर 155261 या 011-24300606 पर कॉल कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण बातें:

केवल उन्हीं किसानों को किस्त मिलती है जिनका आधार और बैंक खाता सही तरीके से लिंक होता है।

KYC पूरी करना अनिवार्य है।

हर किस्त के पहले राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा पात्रता की दोबारा पुष्टि की जाती है।

PM Kisan 20वीं किस्त का पैसा अगर आपके खाते में आ गया है, तो यह आपके लिए एक राहत की खबर है। यदि नहीं आया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है—ऊपर बताए गए तरीकों से आप स्टेटस चेक कर सकते हैं और जल्द समाधान पा सकते हैं।