सच्ची पहाड़ी डरावनी कहानी परिचय: क्या सच में छाया इंसान से अलग होती है?
उत्तराखंड की ऊँचाई पर बसा एक ऐसा भूतिया गांव, जो अब सिर्फ कहानियों में बचा है — नाम है टिहरा। कहा जाता है, वहां इंसान की परछाइयां उनसे अलग हो जाती हैं, और जो वहां एक बार गया, उसकी आत्मा कभी लौट नहीं सकी।
राजीव का सफर: फोटोग्राफी से भय तक
राजीव, एक घुमक्कड़ और यूट्यूबर, हिमालय के गांवों की तस्वीरें और लोककथाएं इकट्ठा करता था। जब उसे टिहरा गांव का ज़िक्र मिला, उसने वहां जाकर वीडियो बनाने का मन बना लिया।
“भूतिया गांव की कहानी में एक नयापन था — और राजीव को ऐसे कंटेंट की तलाश हमेशा रहती थी।”
पहाड़ों की चढ़ाई और पहली चेतावनी
सफर शुरू होता है हल्द्वानी से
रास्ते में मिलती है एक बूढ़ी औरत जो कहती है:
“टिहरा जाने वाला कभी इंसान बनकर वापस नहीं आता।“
वीरान गांव का पहला दीदार
गांव में प्रवेश करते ही हर घर अधखुला, हर खिड़की में कोई न कोई भूत की छाया।
राजीव ने कैमरा ऑन किया… और अचानक सामने आई एक महिला की सफेद परछाई।
रिकॉर्डिंग में दर्ज हुआ असली डर
मैंने जब फुटेज देखा, उसमें एक लड़की खड़ी थी — खून बहती आंखों के साथ।”
“लेकिन वह वहां असल में नहीं थी…”
मंदिर का रहस्य: शिव नहीं, छाया की पूजा?
गांव के बीच में था एक टूटा शिव मंदिर
दीवार पर खून से लिखा:

“यह गांव आत्माओं का है। जो आया, वो छाया बन गया।”
“यह गांव आत्माओं का है। जो आया, वो छाया बन गया।”
राजीव ने मंदिर के गर्भगृह में एक आकृति देखी — काली परछाई, जो दीवारों में समा रही थी। अचानक मंदिर का दरवाज़ा खुद-ब-खुद बंद हो गया। हवा में अजीब सी गंध फैलने लगी — जैसे किसी चीज़ को जलाया गया हो।
रात का आतंक: जब धुंध में परछाइयां जागीं
हर रास्ता वहीं लौट आता था
एक उल्टा लटका बच्चा, पेड़ों से झांकती आंखें
और फिर एक आवाज़:
“अब तू भी हमारे जैसा है…”
मंदिर में बची आखिरी सांस
राजीव भागते-भागते एक हनुमान मंदिर तक पहुंचता है और वहीं बेहोश हो जाता है।
सुबह उसकी आंख एक अस्पताल में खुलती है — लेकिन उसके कैमरे की रिकॉर्डिंग गायब थी।
बस एक फोटो… जिसमें तीन परछाइयां… और चौथी बिल्कुल राजीव जैसी।
निष्कर्ष: क्या वह आज भी अकेला है?
अब वह कहीं नहीं जाता, ना कैमरा उठाता है। लेकिन कभी-कभी…
“उसे अब भी कोई बुलाता है… उसकी परछाई…“
Final Thoughts: डरावनी कहानी या सच्चाई?
“टिहरा” आज भी उत्तराखंड की किसी गुमनाम पहाड़ी पर मौजूद है।
कहते हैं, वहां आज भी लोग जाते हैं… लेकिन लौटते सिर्फ छाया बनकर।
और कहानी पड़े:
लाइव स्ट्रीम के दौरान हिली ये भूतिया गुड़िया—देखने वालों की चीखें निकल गईं
ख़ामोशी की आवाज़: राहुल ने सुनी उस घर की खामोशी में छुपी डरावनी आवाज़ — जो आपके होश उड़ा देगी!



















